Saturday, 30 July 2016

मेरे ट्रैकिंग अनुभव से कुछ बातें




महत्वपूर्ण सामग्री- ट्रैकिंग किट के लिए

वैसे तो हर इंसान की जरूरतें अलग-अलग होती हैं, लेकिन घुमक्कडी और विशेष रूप से ट्रैकिंग में कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिनको कई बार हम ख़ास महत्त्व नहीं देते। लेकिन मेरा मानना है कि एक ट्रैकर के पास ये सामान अवश्य ही उसके ट्रैकिंग बैग या किट में होने चाहिए।

Friday, 29 July 2016

सतोपन्थ ट्रैक (भाग ७)- चक्रतीर्थ से सतोपन्थ


चक्रतीर्थ से सतोपन्थ

रात भर नींद नहीं आई, बस इसी इन्तज़ार में रात कटी कि कब सुबह हो। बादल भी लगभग पूरी रात रुक-रुक कर बरसते ही रहे। सुबह उजाला होते ही टेण्ट से बाहर निकल आया। मालूम पड़ा जाट देवता और सुमित भी अच्छे से सो नहीं पाए। अपनी टोइलेट्री किट उठाई और आधा किलोमीटर दूर जहाँ पानी उपलब्ध था फ्रेश होने जाना पड़ा। चार हज़ार मीटर की ऊँचाई पर नित्यकर्म से निवृत होने के लिए सुबह-सुबह आधा किलोमीटर दूर जाना भी अपने आप में एक ट्रैक करने के समान ही होता है। कई साथी तो इस दूरी को देखकर गए ही नहीं। कुछ एक ऐसे थे कि पानी नहीं तो मुझसे टॉयलेट पेपर लेकर नजदीक ही गए, इसी से काम चला लेंगे। चाय पीकर आज की ट्रैकिंग की बात होने लगी। चक्रतीर्थ से सतोपन्थ की दूरी छह किलोमीटर है। चक्रतीर्थ जहाँ समुद्र तल से ४१०० मीटर की ऊँचाई पर स्थित है वहीँ सतोपन्थ ४३५० मीटर की ऊँचाई पर।

Tuesday, 26 July 2016

सतोपन्थ ट्रैक (भाग-६)- लक्ष्मीवन से चक्रतीर्थ


लक्ष्मीवन से चक्रतीर्थ

हिमालय की ऊँची चोटियों पर सूर्यादय जल्दी होने के साथ-साथ सुबह भी जल्दी हो जाती है। टेण्ट के बाहर कुछ साथियों की हलचल भी सुनाई देने लगी थी। बाहर तापमान काफी कम था, फिर भी जितनी उम्मीद थी उतनी ठण्ड नहीं झेलनी पड़ी। जहाँ पर हमने टेण्ट लगाए थे, उससे दो सौ मीटर की दूरी पर ऊपर ग्लेशियर से बहकर आता एक बर्फीले पानी का नाला था। ब्रश आदि लेकर वहीँ गए और फ्रेश हो गए। मुहँ धुलने के बाद अंगुलियां ऐसी सुन्न पड़ी कि जल्दी से वहीँ पर बबूल की सूखी घास इकठ्ठा करके आग जलाकर हाथ सेकने पड़े, तब जाकर कुछ शान्ति मिली।

Thursday, 21 July 2016

सतोपन्थ ट्रैक (भाग ५)- बद्रीनाथ से लक्ष्मीवन

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बद्रीनाथ से लक्ष्मीवन

सुबह पाँच बजे आँख खुल गई। रमेश जी और सचिन त्यागी को भी बद्रीनाथ से ऋषिकेश जानी वाली पहली बस से वापिस जाना था। दोनों लोगों से विदा ली और फ्रेश होकर यात्रा की तैयारी करने लग गए। गज्जू भाई को सुबह जल्दी आकर राशन व अन्य सामान की पैकिंग करने को कहा था लेकिन वो अभी तक नहीं पहुंचा। फिर भी सभी मित्र तैयार होने लगे। आज हमको बद्रीनाथ से बारह किलोमीटर दूर लक्ष्मीवन में रुकना था। बद्रीनाथ की समुद्र तल से ऊँचाई लगभग ३१५० मीटर है, जबकि लक्ष्मीवन लगभग ३७०० मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। चढ़ाई के मामले में आज आसान चढ़ाई मिलने वाली थी।

Saturday, 16 July 2016

सतोपन्थ ट्रैक (भाग ४)- वसुधारा से बद्रीनाथ और तैयारियां

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वसुधारा से बद्रीनाथ और तैयारियां

हम दोनों जब बाबा जी की कुटिया में गए तो वहां पहले से ही तीन चार लोग बाबा जी के साथ बैठे थे। एक दो बुजुर्ग भी थे, शायद गुजरात से आए हुए श्रद्धालु थे। नौजवान बाबा जी सभी को चाय जरूर पिलाते हैं। अगर भूखे होंगे तो भोजन भी करवा देते हैं। बाबा जी की बातों से ही आभास हो रहा था कि पढ़े लिखे इंसान हैं।