Friday, 28 April 2017

उत्तराखण्ड बाइक यात्रा (भाग-6) - कालागढ़ डैम व कोटद्वार की ओर



पांचवा दिन (दिनांक: 13-12-2016)

सुबह चाय सीधे बिस्तर पर ही गयी कहाँ तो कल हम सर छुपाने के लिए जगह ढूंढ रहे थे और अब यहाँ पूरी आवाभगत नसीब हो रही है जल्दी से उठ कर आगे की यात्रा की तैयारी कर ली रावत जी ने कल रात को ही बता दिया था कि आजकल डैम पर किसी भी बाहरी व्यक्ति के जाने पर प्रतिबन्ध लगा हुआ है भारतीय सेना के पाकिस्तान में घुस कर सर्जिकल स्ट्राइक करने के बाद से सभी संवेदनशील जगहों की सुरक्षा के चलते ऐसा किया गया है


Wednesday, 26 April 2017

उत्तराखण्ड बाइक यात्रा (भाग-5) - धुमाकोट से कालागढ़

चौथा दिन (दिनांक: 12-12-2016)



सुबह सूर्योदय पूर्व ही नींद खुल गयी. पहाड़ों पर स्वतः ही यह मेरे साथ होता है अन्यथा दिल्ली में तो जब तक बीबी चार बातें न सुना दे तब तक आँख क्या कान भी नहीं खुलते. आज उत्तराखण्ड के मैदानी शहर कालागढ़ तक पहुंचना तय किया था. कोई जल्दबाजी भी नहीं दिखाई, आराम से तैयार होकर नीचे सड़क पर आ गए. एक-एक चाय पी और बाइक में सामान बाँधने की प्रक्रिया पूर्ण हुई तो होटल मालिक का हिसाब किताब चुकता कर आगे निकल पड़े.

Wednesday, 22 March 2017

उत्तराखण्ड बाइक यात्रा (भाग-4) - गैरसैण से धुमाकोट (नैनीडांडा)


तीसरा दिन (दिनांक: 11-12-2016)


सुबह छह बजे होटल मलिक ने चाय की प्याली के साथ जगा दिया। सुमित को आज श्रीनगर वापिस जाना था तो उसने घर वापसी की तैयारी शुरू कर दी। किसी भी यात्रा पर साथी का बीच से वापिस जाना कुछ देर के लिए दुखी जरूर करता है। लेकिन क्या कर सकते हैं, घर-परिवार की जिम्मेदारियां भी महत्वपूर्ण हैं। सुमित ने अपना बैग तैयार कर हम तीनों से विदा ले ली। आज दिन के लिए तय किया था कुमाऊँ और गढ़वाल की ठीक सीमाओं से होकर जाती हुई सड़क से गुजरकर नैनीडांडा तक पहुंचना। वहां से आगे रामनगर होकर कालागढ़ की ओर निकल जाएंगे। गूगल मैप की मदद ली तो उसने दो रास्ते दिखाए, एक रास्ता रानीखेत होकर रामनगर जाता हुआ दिखाई दिया, और दूसरा मार्ग ठेठ पहाड़ी और थोडा लम्बा था जो ठीक गढ़वाल और कुमाऊँ की सीमा से होकर धुमाकोट/नैनीडांडा जा रहा था।


Thursday, 9 February 2017

उत्तराखण्ड बाइक यात्रा (भाग-3) :- दूधातोली ट्रैक

दूधातोली ट्रैक

 “अगर मुझे एक चन्द्र सिंह "गढ़वाली" और मिल जाता तो भारत कब का आजाद हो जाता” :- महात्मा गाँधी 


बात 23 अप्रैल सन 1930 की हैगढ़वाल रायफल की एक पलटन पेशावर में तैनात थी पेशावर के किस्साखानी इलाके में आजादी के दीवाने पठानों की एक सभा हो रही थी, गढ़वाल रायफल की पलटन को इस इलाके में जाकर विद्रोह को कुचलने का निर्देश हुआ, इस पलटन की अगुवाई कप्तान रेकेट कर रहे थे कप्तान रेकेट ने जब इन निहत्थे लोगों पर गोली बरसाने के आदेश दिए तो हवलदार मेजर चन्द्र सिंह भण्डारी ने अपनी पलटन को सीज फायर का आदेश दे दिया तथा निहत्थे लोगों पर गोली बरसाने से इन्कार कर दिया। इसके बाद 72 गढ़वालियों की इस पलटन पर कोर्ट मार्शल का आदेश हुआ जिसमे इनको सजाये मौत की सजा सुना दी गई। बैरिस्टर मुकुन्दीलाल ने इन गढ़वाली सैनिकों का मुकदमा लड़ा और इनकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलवा दिया। इन्ही हवलदार मेजर चन्द्र सिंह भण्डारी की जन्मभूमि क्षेत्र है चान्दपुर गढ़ी।

वीर चन्द्र सिंह "गढ़वाली" का काफी समय तक अंग्रेजो द्वारा गढ़वाल में प्रवेश निषेध था अपने अन्तिम समय में वे जब अपनी जन्मभूमि में आए तो उनकी इच्छा थी कि उनकी समाधि को किसी ऊंचे और खूबसूरत स्थान पर बनाया जाए, जहाँ देवदार के वृक्ष हों। भारत के इसी वीर गढ़वाली सपूत का समाधि स्थल दूधातोली में है।

Tuesday, 7 February 2017

उत्तराखण्ड बाइक यात्रा (भाग 2) :- आदि बद्री व चांदपुर गढ़ी

उत्तराखण्ड बाइक यात्रा (8 दिसम्बर से 15 दिसम्बर 2016)
2-तीसरा दिन (10-12016)

सुबह छह बजे सभी जग गए। जग क्या गए जगा दिए गए, रात को होटल में कह दिया था कि सुबह चाय मिल जायेगी तो मजा आ जाएगा। होटल मालिक ने हमारी इच्छा का पूरा ख्याल रखा और कमरे में ही चाय भिजवा दी। बाहर मौसम में ठंडक थी। जल्दी से तैयार होकर आज की घुमक्कड़ी के लिए कमर कस ली। होटल में नाश्ता बनाने को कह दिया इतने में हम 3 किलोमीटर पीछे “चांदपुर गढ़ी” घूमकर वापिस आ जाएंगे।


Friday, 27 January 2017

उत्तराखण्ड बाइक यात्रा (भाग 1) :- दिल्ली से आदि बद्री

उत्तराखण्ड बाइक यात्रा (8 दिसम्बर से 15 दिसम्बर 2016)

आयोजन और पहला दिन :-
दिल्ली से हरिद्वार (8 दिसम्बर 2016)


पिछले माह जब कार से उत्तराखण्ड की यात्रा की थी तो गढ़वाल के राठ क्षेत्र का एक हिस्सा देखा था। तभी मन बना लिया था कि इधर दुबारा जरूर आऊंगा और बाकी का हिस्सा भी खंगालूँगा। यात्रा से वापिस आने के बाद मन में यही पशोपेश चलता भी रहा। इधर ट्रैकिंग का कीड़ा भी दिन प्रतिदिन जवान होता जा रहा था। ट्रेक के नाम पर कैलाश कुण्ड के बाद कहीं नहीं गया था। “पंवाली कांठा” ट्रेक भी काफी समय से मन में है, सोचा इसी को कर आऊँ। इस ट्रेक को करने की तारीख भी तय कर ली थी और इसके बाबत फेसबुक पर भी लिख दिया था। एक दो फेसबुक मित्रों ने इस ट्रेक पर साथ चलने कि इच्छा भी जताई। लेकिन तभी इन्ही दिनों मोदी जी ने नोटबंदी बम फोड़ दिया। इस बम का ऐसा असर हुआ कि “पंवाली कांठा” ट्रेक खटाई में पड़ गया।

Wednesday, 25 January 2017

कल्पेश्वर-रुद्रनाथ यात्रा (अन्तिम भाग)- पकड़ कमण्डल, उतर जा मण्डल

इस यात्रा वृतान्त को शुरू से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें.
पञ्चगंगा से मण्डल (पकड़ कमण्डल, उतर जा मण्डल)

सुबह सूर्योदय से पूर्व ही उठ गए। मौसम साफ़ लग रहा था, जल्दी से नित्यकर्म से निव्रत होकर बैग बाँध लिए। दूरी के हिसाब से आज भी अच्छी-खासी तय करनी थी। लेकिन आज की ट्रैकिंग की खासियत ये थी कि सिर्फ आधा किलोमीटर चढ़ाई और बाकी पूरी उतराई थी। चढ़ाई पर मुझे कोई ख़ास परेशानी नहीं होती। लेकिन उतराई में मेरी रफ़्तार बहुत कम हो जाती है। ढाबे से मैगी खाकर निकल पड़े। पञ्चगंगा समुद्र तल से ३६२० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ से हमको नौला पास (३७६० मीटर) तक चढ़कर मंडल (१५२० मीटर) उतरना था। दूरी लगभग सोलह किलोमीटर है।